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राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA), मुंबई एवं सृष्टि फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सीमा शुल्क आयुक्त एवं लोकप्रिय कवि श्री असलम हसन के बहुप्रतीक्षित काव्य संग्रह “पोटली में चाँद” का भव्य लोकार्पण एवं साहित्यिक विमर्श संपन्न हुआ।

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राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA), मुंबई एवं सृष्टि फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सीमा शुल्क आयुक्त एवं लोकप्रिय कवि श्री असलम हसन के बहुप्रतीक्षित काव्य संग्रह “पोटली में चाँद” का भव्य लोकार्पण एवं साहित्यिक विमर्श संपन्न हुआ। यह अनूठा और ऐतिहासिक आयोजन मुंबई के लगभग दो सौ वर्ष पुराने मशहूर कोवासजी जहाँगीर पब्लिक हॉल में आयोजित किया गया।
सृष्टि फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री बिपिन गुप्ता के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य मर्मज्ञ आदरणीय श्री बोधिसत्व जी, श्री देवमणि पांडेय जी एवं श्री हरि मृदुल जी ने पुस्तक पर अपने सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का चुटीला और रसीला संचालन प्रिय रवि यादव जी द्वारा किया गया।
इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि हर वक्ता ने केवल और केवल उत्सव मूर्ति यानी असलम हसन जी को ही अपना विषय बनाया।
शारदात्मज श्री सरोज सुमन जी (संगीतकार एवं गायक) ने अपने सुमधुर स्वरों से पूरे सभागार को गुंजायमान कर दिया।
असलम जी की कविताओं को जी.एस.टी. आयुक्त एवं मशहूर शायर श्री अजय साहब, सीमा शुल्क मुख्य आयुक्त श्री आलोक झा, ‘अनारकली ऑफ आरा’ फ़िल्म के लेखक-निर्देशक श्री अविनाश दास, मंचीय कलाकार सुश्री विनीता यादव, मशहूर शायर/संयोजक श्री नवीन जोशी नवा, श्री नज़र बिजनौरी, बिपिन गुप्ता, नवीन चतुर्वेदी इशरत बगनानी एवं अन्य वक्ताओं ने मंच से पढ़कर सुनाया।

इस भव्य साहित्यिक संध्या में शहर के कई विशिष्ट नागरिक और कला प्रेमी उपस्थित रहे। श्रोताओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य हस्तियां शामिल थीं:
आयकर आयुक्त श्री विवेकानन्द प्रेमपूर्ण और डीआरटी जज हरीश कौशिक,डॉ खालिद ,फ़िल्म निर्माता श्री गणपति कोठारी और प्रसिद्ध आर जे एवं लेखिका सुश्री शिल्पा राठी,कवि एवं शायर सर्वश्री शिव दत्त अक्स, रमेश यादव, माधव बर्वे ‘नूर’, मुस्तहसन आज़मी, क़मर हाजीपुरी, मोहम्मद सुलेमान फारूकी और अकबर अहमद।
कवयित्री एवं लेखिका सुश्री पूनम विश्वकर्मा, रोशनी किरण, रीमा राय सिंह, अर्चना वर्मा सिंह, बुशरा तबस्सुम।
असलम हसन जी की कविताएं कृत्रिम अभिव्यंजना से बाक़ायदा दामन बचाते हुए वास्तविकता के धरातल पर क़दमताल करती हैं। सदैव मुस्कुराते रहने वाले असलम जी का यह काव्य संग्रह नैसर्गिक काव्य के रसिकों के लिए एक अत्यंत सुन्दर उपहार है।

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