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नन्हे बच्चों को ‘गोमांस’ खाने की अजीब सलाह!

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वाशी अस्पताल के आपत्तिजनक पत्रक नष्ट कर सभी दोषियों पर मामला दर्ज किया जाए! – हिन्दू जनजागृति समिति की मांग

नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका के वाशी सार्वजनिक अस्पताल में ‘भारतीय बालरोग अकादमी’ (IAP) द्वारा छोटे बच्चों के पूरक आहार संबंधी पत्रक में ‘गोमांस’ (बीफ) खाने की सलाह दिए जाने का चौंकानेवाला मामला सामने आया है। राज्य में गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून लागू होने तथा शासन द्वारा गौमाता को ‘राज्य माता’ घोषित किए जाने के बावजूद सरकारी अस्पताल में इस प्रकार का प्रचार करना कानून का उल्लंघन एवं शासन का प्रत्यक्ष अपमान है। इस मामले में संबंधित संस्था और अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के राज्य संगठक श्री सुनील घनवट ने मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री को लिखित निवेदन देकर की है। इस संबंध में नवी मुंबई महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त श्री सुनील पवार को भी ज्ञापन सौंपा गया है। यह ज्ञापन श्री रवींद्र नलावडे, श्री अशोक सावंत तथा श्री गोविंद प्रसाद दुबे द्वारा प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन की प्रति नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है।

हिन्दू समाज में गाय का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है तथा गोहत्या को महापाप माना गया है। साथ ही, जिन बच्चों को मां का दूध उपलब्ध नहीं होता, उनके लिए गौमाता को दूसरी माता माना जाता है। ऐसी संवेदनशील पृष्ठभूमि में छोटे बच्चों को गोमांस खाने के लिए प्रेरित करने वाली यह विकृत सोच करोड़ों हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली तथा समाज में धार्मिक वैमनस्य उत्पन्न करनेवाली है। आज एक ओर पश्चिमी देश भारतीय नस्ल की देशी गायों के महत्व को समझते हुए मानसिक शांति के लिए ‘काउ थेरेपी’ का व्यापक उपयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे देश में गिर, साहिवाल और देवनी जैसी दुर्लभ नस्लों की संख्या घट रही है। ऐसी स्थिति में भारत की एक जिम्मेदार स्वास्थ्य संस्था द्वारा गोमांस सेवन को परोक्ष रूप से प्रोत्साहित करना एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है, जिससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका है।

इस गंभीर प्रकरण की कड़ी निंदा करते हुए हिन्दू जनजागृति समिति प्रशासन से मांग करती है कि भारतीय बालरोग अकादमी (IAP) तथा वाशी महानगरपालिका अस्पताल के उन सभी संबंधित अधिकारियों पर तत्काल आपराधिक मामले दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए, जिन्होंने इस विवादास्पद पत्रक को अनुमति दी। साथ ही नवी मुंबई तथा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों से ऐसे विवादास्पद एवं आपत्तिजनक पत्रकों को तत्काल जब्त कर नष्ट करने के आदेश दिए जाएं। यदि प्रशासन द्वारा समय रहते इस विषय पर ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो तीव्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, ऐसा चेतावनी स्वरूप में श्री. घनवट ने कहा है।

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