महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रयासों को मिली सफलता
मुंबई
लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की कुलदेवी तुलजापुर स्थित श्री तुलजाभवानी देवी की 4 हजार 121 एकड़ से अधिक की इनामी भूमि के अवैध हस्तांतरण और बिक्री मामले की अब राज्य सरकार द्वारा जांच की जाएगी। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट द्वारा सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने धाराशिव के जिलाधिकारी को इस संबंध में तुरंत एक जांच समिति गठित कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। तत्कालीन निजाम सरकार ने श्री तुलजाभवानी देवी को 1 हजार 666.14 हेक्टेयर यानी लगभग 4 हजार 121.14 एकड़ भूमि इनाम के रूप में दी थी। कानूनन इस जमीन की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती और इस पर ‘किराया (कुळ) कानून’ भी लागू नहीं होता। इसके बावजूद, राजस्व अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत से हजारों एकड़ जमीन हड़पने का आरोप है।
श्री तुलजाभवानी संस्थान के नाम पर कागजों में 3 हजार 397 एकड़ भूमि दर्ज है, लेकिन इसका वास्तविक कब्जा चार मठों से जुड़े निजी व्यक्तियों के पास है। इसके अलावा, जगदंबा न्यास (ट्रस्ट) के नाम पर दर्ज 403 एकड़ जमीन को मुख्य न्यास को अंधेरे में रखकर सीधे निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया। कानून का उल्लंघन करते हुए 63.03 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्से को ‘संरक्षित किरायेदार’ (प्रोटेक्टेड टेनेंट) दिखाकर अवैध रूप से बेच दिया गया, जबकि एक क्लर्क (अव्वल कारकून) ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 261 एकड़ जमीन को 73 निजी व्यक्तियों के नाम पर 7/12 (भूलेख) पर दर्ज कर दिया। इसके अतिरिक्त, अपसिंगा और उफला गांवों की 158 एकड़ जमीन को अवैध रूप से फेरबदल (म्यूटेशन) करके हड़प लिया गया है।
इस मामले में शामिल सभी संबंधितों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए! – सुनील घनवट, राष्ट्रीय समन्वयक, मंदिर महासंघ
इस मामले में अवैध हस्तांतरण में शामिल तत्कालीन उपजिलाधिकारी, न्यासियों (ट्रस्टी) और अन्य संबंधित प्रभावशाली लोगों के खिलाफ तुरंत मामले दर्ज किए जाने चाहिए, यह महासंघ की मांग है। सरकार को अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए सभी अवैध खरीद-बिक्री के दस्तावेजों और 7/12 की प्रविष्टियों को तुरंत रद्द करना चाहिए, तथा पूरी 1 हजार 666.14 हेक्टेयर भूमि को फिर से श्री तुलजाभवानी मंदिर के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाना चाहिए, यह हमारी पुरजोर मांग है.

