हिंदू जनजागृति समिति की रेलवे प्रशासन को सीधी चेतावनी
मुंबई : लाखों नौकरीपेशा लोगों की ‘जीवनरेखा’ कही जानेवाली मुंबई की उपनगरीय रेलवे वर्तमान में अत्यंत गंभीर और समाजविघातक गतिविधियों का केंद्र बनती जा रही है, ऐसा चौंकानेवाला तथ्य सामने आया है। पनवेल-सीएसएमटी मार्ग की ‘एसी’ लोकल सहित अन्य ट्रेनों में ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाई जा रही कथित गुप्त ‘धर्मांतरण मुहिम’ और खुलेआम चल रहे ‘पाखंड’ के प्रकारों को लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए हिंदू जनजागृति समिति ने राज्य के पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग और मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को विस्तृत ज्ञापन भेजा है। समिति ने इसके पीछे के मुख्य सूत्रधारों और विज्ञापन छापने वाले प्रिंटिंग प्रेसों के विरुद्ध तत्काल अपराध दर्ज करने की मांग की है। साथ ही प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाने पर जनआंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई है।
यात्रियों की भावनात्मक और मानसिक परेशानियों का लाभ उठाकर धर्मांतरण का सुनियोजित जाल रेलवे डिब्बों में फैलाया जा रहा है। ‘क्या आपको जीवनरेखा चाहिए?’, ‘यीशु भगवान हैं’ जैसे भावनात्मक शीर्षकों वाले पर्चे डिब्बों में लगाकर निराश या परेशान यात्रियों का कथित रूप से व्यवस्थित तरीके से ‘ब्रेनवॉश’ किया जा रहा है। विशेष रूप से इन विज्ञापनों पर ‘ThisLoveStory.org’ जैसी वेबसाइटों के पते देकर यात्रियों को धर्मांतरण के जाल में फंसाने का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। रेलवे जैसी सार्वजनिक संपत्ति का इस प्रकार खुलेआम दुरुपयोग अत्यंत आपत्तिजनक है, ऐसा समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है।
इस धर्मांतरण अभियान के साथ-साथ लोकल डिब्बों में अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की भी भरमार हो गई है। ईसाई मिशनरी फादरों की ‘चंगाई सभाओं’ के पोस्टर लगाकर केवल प्रार्थना से कैंसर जैसे गंभीर रोगों को ठीक करने के अवैज्ञानिक दावे किए जा रहे हैं। इसके अलावा ‘100% वशीकरण’ और ‘प्रेम संबंध ठीक करने वाले बंगाली बाबा’ जैसी भ्रामक विज्ञापन यात्रियों की आर्थिक लूट कर रहे हैं। जादू-टोना विरोधी कानून के अनुसार ये अपराध गैर-जमानती होने के बावजूद रेलवे प्रशासन केवल मूक दर्शक बना हुआ है, इस पर आश्चर्य व्यक्त किया गया है।
हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने कहा कि केवल दिखावटी उपायों के बजाय अब मूल कारणों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। यात्रियों को तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए रेलवे को ‘व्हाट्सऐप हेल्पलाइन’ शुरू करनी चाहिए। रेलवे की सादी वर्दी वाली विशेष टीमों की नियुक्ति कर ऐसे तत्वों को रंगे हाथ पकड़ना चाहिए। साथ ही विज्ञापनों में दिए गए फोन नंबर और वेबसाइट की साइबर पुलिस के माध्यम से गहन जांच कर संबंधित संस्थाओं, फादरों और पाखंडी बाबाओं के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। ऐसे समाजविघातक विज्ञापन छापने वाले प्रिंटिंग प्रेसों की पहचान कर उनके खिलाफ भी अपराध दर्ज किए जाएं और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं, ऐसी मांग समिति ने की है। पिछले पांच वर्षों में ऐसी अनधिकृत विज्ञापनों पर रेलवे प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, इसकी श्वेतपत्रिका सार्वजनिक की जाए, ऐसी मांग श्री. घनवट ने की है।


