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महाराष्ट्र अपने खाली खजाने को भरने के लिए शराब महंगी करने की तैयारी में

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राजस्व बढ़ाने के के लिए एक विशेष पांच सदस्यीय समिति गठित की गई


विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने लड़की बहन योजना सहित कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की थीं। स्वाभाविक है कि इसका असर राज्य के खजाने पर पड़ेगा। राज्य के खजाने पर बोझ कम करने का बोझ महाराष्ट्र के शराब प्रेमियों पर पड़ने की संभावना है। क्योंकि राज्य सरकार राजकोष पर बोझ कम करने के लिए कुछ उपाय तलाश रही है। इसके तहत राज्य की महागठबंधन सरकार आने वाले दिनों में शराब और सिगरेट पर कर बढ़ा सकती है।

राज्य सरकार ने राजस्व में वृद्धि कर राज्य की आय बढ़ाने के नए तरीके खोजने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने चंद्रपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में की। यह समिति इस बात की व्यवहार्यता का अध्ययन करेगी कि राजस्व सृजन के नए तरीके के रूप में शराब के उत्पादन और बिक्री पर किस प्रकार कर लगाया जा सकता है।

गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता वाली यह समिति राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य की शराब नीति का अध्ययन करेगी। इसके अलावा वित्त एवं राज्य आबकारी विभागों के अतिरिक्त सचिव, राज्य जीएसटी आयुक्त और आबकारी आयुक्त इस समिति के सदस्य होंगे।

वे मिलकर शराब के उत्पादन, शराब बिक्री लाइसेंस, उत्पाद शुल्क तथा अन्य राज्यों द्वारा अपनाई गई राजस्व संग्रहण विधियों और नीतियों का अध्ययन करेंगे। इस समिति से राज्य की राजस्व आय बढ़ाने के उपायों पर सिफारिशें करने की अपेक्षा की जाती है। इसके साथ ही राज्य सरकार की मंशा शराब की अवैध बिक्री को रोकने और लाइसेंस के आधार पर अधिकतम शराब वितरित करने की है।

विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने बड़ी घोषणाएं कीं। महायुति ने भी चुनाव से पहले कई वादे किए थे। लड़की बहन और ऐसी अन्य योजनाओं की भी घोषणा की गई। अब जब राज्य में महागठबंधन की सरकार बन गई है तो उन वादों को पूरा करना होगा। लड़की बहन योजना का उदाहरण लें तो इस योजना के लिए हर साल ४६,००० करोड़ रुपये की धनराशि की आवश्यकता होगी।

इसमें से राज्य सरकार को लड़का भाई योजना के तहत दी जाने वाली राशि को १,५०० रुपये से बढ़ाकर २,००० रुपये करने के लिए ६०० करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता होगी। इसके साथ ही सरकार को मुफ्त बिजली और कर्ज माफी जैसी योजनाओं को लागू करने के लिए भी धन की जरूरत है। राज्य का कर्ज ८ लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है, इसलिए राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने की जरूरत है।

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