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महाकुंभ 2025: संस्कृति और प्रौद्योगिकी का संगम

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श्रीमती जया वर्मा सिन्हा पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), रेलवे बोर्ड

श्रीमती जया वर्मा सिन्हा पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), रेलवे बोर्ड

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महा गंगा की लहरें शांति से बहती हैं, प्राचीनता और नवाचार को अपनाती हैं, जीवन को सशक्त बनाती हैं और उन सभ्यताओं को पोषित करती हैं जो इसके प्रत्येक क़तरे को पूजती हैं। सदियों से मनाई जा रही, हर बार जब गंगा के संगम पर होने वाला कुम्भ मेला अपने 12 वर्षीय चक्र के अनुसार होता है, तो लाखों श्रद्धालु आकर इसके आशीर्वाद से निहाल होते हैं। यह कुम्भ मेला प्रयाग में गंगा, यमुन और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आयोजित होता है, और यह हमारे पूर्वजों से एक प्रतीकात्मक संबंध स्थापित करता है। 2025 का महाकुंभ, जो इस समय प्रयाग में आयोजित हो रहा है, में 45 दिनों के दौरान लगभग 300 मिलियन श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा बना देगा। इस विशाल मानव-समूह को संगम तक पहुंचाने और उसके आशीर्वाद में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों ने व्यापक प्रयास किए हैं।


महाकुंभ 2025 के लिए भारतीय रेलवे न केवल यात्रा की सुविधा प्रदान कर रहा है, बल्कि पूरे अनुभव को परंपरा और प्रौद्योगिकी का अद्भुत संगम बना रहा है। कुम्भ से संबंधित अवसंरचना परियोजनाओं के लिए पिछले तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें एक नया नदी पुल भी शामिल है। इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए किए गए डिजिटल प्रयास रेल यात्रा को सुखद बनाने में अग्रणी हैं।


यात्रा का डिजिटल रूपांतरण


भारतीय रेलवे द्वारा लॉन्च की गई “कुम्भ रेल सेवा” वेबसाइट एक समग्र डिजिटल मंच है, जो रेल सेवा से संबंधित वास्तविक समय की जानकारी, टिकट उपलब्धता और स्टेशन सुविधाओं की जानकारी प्रदान करती है। बहुभाषी मोबाइल ऐप के साथ यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी श्रद्धालु भाषा या तकनीकी अवरोधों के कारण पीछे न रह जाए। श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं, टिकट बुक कर सकते हैं, और आवश्यक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं – यह एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे लाखों की भीड़ को आसानी से संभाला जा सकता है।


सुलभता और समावेशन को बढ़ाने के लिए, घोषणा 12 प्रमुख भारतीय भाषाओं में की जा रही है, ताकि देश की भाषाई विविधता का ध्यान रखा जा सके। जानकारी पुस्तिका 22 भाषाओं में उपलब्ध है। इसके अलावा, टोल-फ्री नंबर भी हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी प्रदान करता है, जिससे बिना किसी भाषा, क्षेत्र या देश की बाधा के सुगम संचार संभव हो सके।


भारतीय रेलवे ने लगभग 2,000 स्टेशनों पर एकीकृत डिजिटल रेलवे डिस्प्ले नेटवर्क स्थापित किया है, जो यात्रियों के लिए वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करता है। इन डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से, श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के दौरान कम से कम परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही, भारतीय रेलवे ने ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपनाया है, ताकि यात्रियों को समय-समय पर अपडेट्स और घोषणाएं मिल सकें।


इन प्रयासों के साथ-साथ, प्रमुख टर्मिनलों पर टच-स्क्रीन कियोस्क भी लगाए गए हैं, जो टिकट काउंटर और सूचना केंद्र दोनों का कार्य करते हैं, जिससे लंबी कतारों को कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, स्टेशनों पर बारकोड आधारित UTS (अविशिष्ट टिकट प्रणाली) और रेलवे कर्मचारियों के हरे जैकेट्स पर QR कोड्स की प्रणाली ने टिकट काउंटरों पर लंबी प्रतीक्षा समय को घटाया है और कागज के उपयोग को भी कम किया है।


वॉर रूम: महाकुंभ अनुभव की सुरक्षा


इस विशाल लॉजिस्टिक ऑपरेशन का नर्व सेंटर है प्रयागराज में स्थित 24×7 महाकुंभ वॉर रूम। अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस यह वॉर रूम वास्तविक समय में रेल संचालन, जन यातायात और भीड़ की निगरानी करता है और महाकुंभ प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय में काम करता है।


सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के लिए 1,000 से अधिक surveillance कैमरे (कुछ फेस रिकग्निशन से लैस) और ड्रोन तैनात किए गए हैं। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राज्य पुलिस के 23,000 से अधिक कर्मी मैदान पर हैं, जो डिजिटल निगरानी और आपदा प्रबंधन प्रणालियों का समर्थन कर रहे हैं।


भविष्य के लिए एक दृष्टिकोण


नवाचार को अपनाते हुए, भारतीय रेलवे न केवल श्रद्धालुओं को यात्रा करवा रहा है, बल्कि एक ऐसा अनुभव बना रहा है जो अतीत और भविष्य के बीच सेतु का कार्य करता है। जो पहलें आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से की जा रही हैं, वे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर और विज्ञान व नवाचार के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन के बीच सुखद सहअस्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। महाकुंभ 2025, सरकार की इस प्रतिबद्धता का प्रतीक है – जहां एक ओर भारतीय विरासत का संरक्षण किया जा रहा है, वहीं भविष्य के लिए एक प्रौद्योगिकी-समृद्ध दिशा भी निर्धारित की जा रही है।

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