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भारतीय नौसेना को छठी स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी वाघशीर की सुपुर्दगी

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Mumbai

माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (“एमडीएल”) ने भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वावलंबन की गाथा को जारी रखते हुए ०९ जनवरी २०२५ को भारतीय नौसेना को छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी वाघशीर, परियोजना पी-७५, की सुपुर्दगी की, जिसे बाद में आईएनएस वाघशीर के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। स्वीकृति दस्तावेज पर आज श्री संजीव सिंघल, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एमडीएल और रियर एडमिरल आर अधीश्रीनिवासन, मुख्य स्टाफ अधिकारी (तकनीकी), पश्चिमी नौसेना कमान द्वारा, कमांडिंग ऑफिसर डिजाइन, वाघशीर, कमांडर विनीत शर्मा, एमडीएल निदेशकों और एमडीएल में प्रतिष्ठित भारतीय नौसेना अधिकारियों की उपस्थिति में, हस्ताक्षर किए गए ।


वाघशीर को २० अप्रैल २०२२ को लॉन्च किया गया था और इसे एक वर्ष से अधिक समय तक व्यापक और कड़े परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजरना पड़ा है, ताकि पूरी तरह से युद्ध योग्य पनडुब्बी की सुपुर्दगी सुनिश्चित की जा सके, जो सभी मोड और परिस्थितियों में परिचालन योग्य है।


इस अवसर, एमडीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि वाघशीर की सुपुर्दगी के साथ, भारत ने पनडुब्बी निर्माण राष्ट्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है और एमडीएल ने भारत के एकमात्र शिपयार्ड के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखा है, जो सभी आयामों में भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की क्षमता रखता है। छह पनडुब्बियों, अर्थात् कलवरी, खंडेरी, करंज, वेला, वागीर और अब वाघशीर की सुपुर्दगी ने पनडुब्बी निर्माण राष्ट्रों के विशेष समूह में भारत की सदस्यता की पुष्टि की है।


स्कॉर्पीन में इस्तेमाल की गई अत्याधुनिक तकनीक ने बेहतरीन स्टील्थ विशेषताओं (जैसे उन्नत ध्वनिक अवशोषण तकनीक, कम विकिरणित शोर स्तर, हाइड्रो-डायनामिक रूप से अनुकूलित आकार आदि) और सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करके दुश्मन पर एक भयावह हमला करने की क्षमता सुनिश्चित की है। हमला पानी के नीचे या सतह पर, दोनों टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च की गई एंटी-शिप मिसाइलों के साथ किया जा सकता है। शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म की स्टील्थ को उसके विशिष्ट जलमग्न संकेतों पर दिए गए विशेष ध्यान से बढ़ाया जाता है। ये स्टील्थ विशेषताएँ इसे एक ऐसी अजेयता प्रदान करती हैं, जो अधिकांश पनडुब्बियों से बेजोड़ है।


वाघशीर बहुआयामी तरह के मिशनों को कर सकता है जैसे एंटी-सरफेस वारफेयर, एंटी-सबमरीन वारफेयर, खुफिया जानकारी जुटाना, एरिया सर्विलांस आदि। इसे परिचालन के सभी क्षेत्रों में संचालित करने के लिए तैयार किया गया है, जो नौसेना टास्क फोर्स के अन्य घटकों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी प्रदर्शित करता है। यह एक और शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म है, जो पनडुब्बी संचालन में एक परिवर्तनकारी बदलाव ला रहा है।


इस पनडुब्बी में एक परिष्कृत एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) और एक लड़ाकू प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) के साथ स्वचालन का एक बहुत ही उच्च स्तर है जो विभिन्न विविध उपकरणों, प्रणालियों और सेंसर को एक प्रभावशाली प्लेटफ़ॉर्म में एकीकृत करता है। अत्याधुनिक विशेषताओं में उन्नत ध्वनिक मौन तकनीक, कम विकिरणित शोर स्तर, हाइड्रो-डायनामिक रूप से अनुकूलित आकार और सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करके दुश्मन पर एक भयावह हमला करने की क्षमता जैसे बेहतरीन स्टील्थ विशेषताएं भी शामिल हैं, जिसमें टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल दोनों शामिल हैं।


इस शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म की स्टील्थ को बढ़ाने के लिए, ध्वनिक, ऑप्टिकल, इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक और इंफ्रारेड सिग्नेचर को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये स्टील्थ विशेषताएँ इसे एक ऐसी अभेद्यता प्रदान करती हैं, जो दुनिया की अधिकांश पनडुब्बियों से बेजोड़ है।


इसके अतिरिक्त, वाघशीर पिछली पांच नौकाओं से अलग है, क्योंकि इस पनडुब्बी में मुख्य बैटरियों और कू-बैंड सैटकॉम (Ku-Band SATCOM) (रुक्मिणी) के अलावा स्वदेशी रूप से विकसित एयर कंडीशनिंग प्लांट और आंतरिक संचार एवं प्रसारण प्रणाली भी लगी हुई है।


स्कॉर्पीन परियोजना ने वर्तमान प्रगति को बिना रक्षा उत्पादन विभाग (DDP), रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना के पूरे निर्माण प्रक्रिया के दौरान निरंतर समर्थन, पाठ्यक्रम सुधार और सक्रिय प्रोत्साहन के बिना प्राप्त नहीं किया होता ।


एमडीएल ने देश की समुद्री जरूरतों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए एक व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम शुरू किया और उसे पूरा किया है। एमडीएल आज एक साथ १० कैपिटल वॉरशिप और ११ पनडुब्बियां बनाने में सक्षम है।

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