0

Share

*सार्क देशों के रास्ते खाद्य तेलों के शुल्क मुक्त आयात ने खाद्य तेल उद्योग की बढ़ाई परेशानियां* *कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा दिलाने की साजिश दिख रही है : शंकर ठक्कर*

Post details:

ree


अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया सार्क देशों जिन में खासकर नेपाल के रास्ते शुल्क मुक्त खाद्य तेल की आयात ने पहले से ही परेशानियों से जूझ रहे खाद्य तेल उद्योग की परेशानी में और भी इजाफा कर दिया है। शुल्क मुक्त आयात के चलते न सिर्फ किसानों का बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इसके असर के चलते बीते कुछ महीनों से नेपाल के रास्ते भारत में खाद्य तेलों का आयात बढ़ रहा है। इससे घरेलू खाद्य तेल उद्योग की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस, यूक्रेन भारत के लिए मुख्य खाद्य तेल आपूर्तिकर्ता देश हैं। भारत सरकार द्वारा आयत शुल्क बढ़ाने के बाद बीते महीनों में नेपाल से तेल का आयात बढ़ा है। इस बीच, देश में जनवरी महीने में पाम तेल का आयात 14 साल के निचले स्तर पर चला गया है जबकि चालू तेल वर्ष की पहली तिमाही में सोयाबीन तेल के आयात में भारी इजाफा हुआ है। चालू तेल वर्ष (नवंबर से अक्टूबर) की नवंबर-जनवरी अवधि में 37.83 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ, जो पिछली समान अवधि के 36.47 लाख टन आयात से 3.72 फीसदी अधिक है। खाद्य व अखाद्य दोनों को मिलाकर इस अवधि में तेल आयात 6 फीसदी बढ़कर 39.08 लाख टन हो गया। हालांकि इस जनवरी खाद्य तेल आयात पिछली जनवरी के 12 लाख टन से घटकर 10.49 लाख टन रह गया।

15 अक्टूबर 2024 से 15 जनवरी 2025 के बीच नेपाल ने करीब दो लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल था। इसी अवधि में नेपाल ने 1.0 लाख टन से अधिक खाद्य तेलों का निर्यात भारत को किया। इससे स्पष्ट हो रहा है नेपाल ने आयात किए खाद्य तेल का आधे से ज्यादा हिस्सा भारत को निर्यात किया है।

नेपाल और अन्य सार्क देशों से भारत आने वाला खाद्य तेल सस्ता पड़ता है। इसलिए सार्क देशों के रास्ते आने वाले खाद्य तेल से न केवल घरेलू खाद्य तेल उद्योग को नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे किसानों के साथ ही सरकार को राजस्व के रूप में चपत लग रही है।

देश में चालू तेल वर्ष के दौरान कच्चे सोयाबीन तेल के आयात में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। नवंबर 2024 से जनवरी 2025 की अवधि में 12. लाख टन से अधिक कच्चे सोयाबीन तेल का आयात हो चुका है, जो पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में आयात हुए 4.91 लाख टन से करीब ढाई गुना अधिक है। जनवरी महीने में सालाना आधार पर सोयाबीन तेल का आयात दोगुने से अधिक बढ़कर 4.44 लाख टन हो गया। सोयाबीन तेल का आयात बढ़ने की वजह इसके दाम पाम तेल से कम होना है। जनवरी महीने में भारतीय बंदरगाह पर कच्चे पाम तेल के दाम 1,170 डॉलर प्रति टन थे, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल के दाम 1,118 डॉलर प्रति टन दर्ज किए गए। सोयाबीन के साथ ही कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात भी बढ़ रहा है। चालू तेल वर्ष में नवंबर-जनवरी अवधि में 8.90 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात हुआ, जबकि पिछली समान अवधि में यह आंकड़ा 6.09 लाख टन था।

*शंकर ठक्कर ने आगे कहा सरकार द्वारा सार्क देशों के रास्ते से जिनमें खासकर नेपाल के रास्ते से आ रहे तेलों पर तुरंत नकेल कसनी चाहिए ताकि किसानों को होने वाले नुकसान,भारत सरकार के राजस्व पर लग रही चपत और तेल उद्योग को हो रही परेशानियों से बचाया जा सके। सरकार को बार-बार निवेदन करने पर भी यदि कोई उचित कार्यवाही नहीं होती है तो इसका साफ-साफ मतलब हे कि कुछ उद्योगपतियों फायदा दिलाने के लिए सरकार इन पर रहम नजर रख रही है।*



Quick Link

Categories

Keep up to date

Email

By pressing the subscribe button, you confirm that you have are agreeing to our Privacy Policy and Terms of Use.

© 2025, ssoninews. All rights reserved.