

Mumbai
जैन धर्म जैसे महान धर्म में बढ़ती हुई शिथिलता शायद अकल्पनीय है। जैन धर्म के अनुयायी कभी कल्पना भी नहीं कर सकते कि साधु के वेश में ऐसे लोग ऐसे अपराध कर रहे हैं। यदि कोई गार्ड पुलिस की वर्दी पहनकर स्वयं शिकारी बन जाता है तो कानून उसे दंडित करता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जैन पत्रकारों के देश के सबसे बड़े संगठन अखिल भारतीय जैन पत्रकार संघ के राष्ट्रीय संस्थापक अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने कहा कि यदि कोई साधु साधु वेश में रहकर नियमों का पालन नहीं करता है तो उस साधु ने अपने वेश को कलंकित किया है। ऐसा कहने वाला कोई साधु नहीं है। इसलिए साधु गलत काम करने से नहीं डरता। ऐसे संत भी जैन शासन के अपराधी हैं, उन्होंने संत के वेश में जैन धर्म के साथ धोखा किया है। हार्दिक हुंडिया ने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल से मुलाकात कर उन्होंने जैन धर्म में बढ़ती शिथिलता और निर्दोष लोगों की जान बचाने में आ रही परेशानियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। गुजरात राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी को भी आईजा के राष्ट्रीय महासचिव महावीर श्रीश्रीमाल ने विस्तृत जानकारी दी और सारी बातें सुनने के बाद गृह मंत्री ने भी कहा कि कानून की मदद से जो भी संभव हो वह करें और सरकार की तरफ से आपको पूरा सहयोग मिलेगा। हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जब तक हम सरकार को सही जानकारी नहीं देंगे, तब तक वे कोई कानूनी कार्रवाई कैसे कर सकते हैं? उनके राज्य में जो कुछ भी घटित होता है, यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, तो देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह इसे सरकार के ध्यान में लाए। जैन धर्म में बढ़ती शिथिलता के खिलाफ आवाज उठाने वाले हार्दिक हुंडिया ने बड़े ही दुख भरे लहजे में कहा कि आखिर समाज चुप क्यों है? धर्म के नाम पर हो रहे गलत कामों को रोकना और रोकना समाज का कर्तव्य है। हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जिस ज्ञानी आत्मा ने परम कृपालु भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीक्षा ली हो, 25वें तीर्थंकर संघ के समक्ष संसार का त्याग कर भगवान महावीर जैसे साधु का वेश धारण किया हो और वह संसार त्यागने के बाद भी सांसारिक कार्यों में रुचि लेता है तो वह सबसे बड़ा पापी है। साधु वेश में एक साधु की विचलित करने वाली तस्वीरें वायरल होने के बाद फोरेंसिक लैब में उनके सत्य सिद्ध होने के बाद भी वह साधु अभी भी साधु के वेश में बैठा हुआ है, जो बहुत ही दुःखद घटना है। हार्दिक हुंडिया ने चेतावनी दी कि यदि समाज ऐसे साधुओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
है। हार्दिक हुंडिया: धर्म में बढ़ती ढिलाई का मुख्य कारण निजी ट्रस्ट हैं। साधु-संतों और निजी ट्रस्टों के ट्रस्टियों की मिलीभगत ने धर्म को व्यवसाय में बदल दिया है। निजी ट्रस्टों के कारण न तो संत और न ही उनके अनुयायी हमारे पुराने तीर्थ स्थलों की ओर ध्यान देते हैं। यदि धर्म के नाम पर व्यापार किया जा रहा हो और उससे सरकार और धर्म को नुकसान पहुंचता दिख रहा हो तो कानूनी कार्रवाई के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।