

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया भारत दुनिया में खाने के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।फरवरी में खाद्य तेल का आयात चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। जिसमें सबसे ज्यादा सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल के आयात में गिरावट के कारण ऐसा हुआ है। हालांकि पाम तेल के आयात में थोड़ा सुधार हुआ है जो जनवरी में 14 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था।
भारत दुनिया में खाने के तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 60% से लेकर 70% तक आयात पर निर्भर है। लगातार दूसरे महीने में खाने के तेल के आयात में गिरावट आई है और आने वाले महीनों में भारत को आयात बढ़ाना पड़ सकता है। पाम तेल का आयात पिछले महीने के मुकाबले 36 फीसदी बढ़कर 374,000 मीट्रिक टन पहुंच गया। अक्टूबर 2024 में खत्म मार्केटिंग वर्ष के दौरान भारत ने हर महीने 750,000 टन पाम तेल का आयात किया था।
फरवरी में सोयाबीन तेल का आयात 36 फीसदी की गिरावट के साथ 284,000 मीट्रिक टन रहा जो इसका आठ महीने का न्यूनतम स्तर है। इसी तरह सूरजमुखी के तेल का आयात भी 22 फीसदी गिरावट के साथ 226,000 मीट्रिक टन रह गया। यह इसका पांच महीने का न्यूनतम स्तर है। विदेशों में ज्यादा कीमत और घरेलू स्तर पर ज्यादा सप्लाई के कारण रिफाइनर्स ने फरवरी में कम आयात किया है।
देश में खाने के तेल का स्टॉक जनवरी के मुकाबले फरवरी में 26 फीसदी गिरकर 16 लाख टन रह गया जो इसका 4 साल का न्यूनतम स्तर है। जनवरी और फरवरी में आयात में कमी के बाद मार्च से आयात में उछाल आने की संभावना है।
*शंकर ठक्कर ने आगे कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने हेतु हाल ही में लोगों से खाने के तेल की खपत को 10 प्रतिशत कम करने का आग्रह किया था। इसके बाद लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है। जिसके चलते आने वाले दिनों में इसका असर भी तेल के खपत पर पढ़ने की संभावना है। हालांकि हमारे देश में अन्य देशों के मुकाबले प्रति व्यक्ति औसतन खाने के तेल का इस्तेमाल पहले से ही कम किया जा रहा